गुना। किसी समय सरकारी अस्पताल के प्रसूति वार्ड का नाम सुनते ही आम आदमी के मन में संशय और सुविधाओं के अभाव की तस्वीर उभरती थी। लोग मजबूरी में यहाँ आते थे, लेकिन किसी भी जटिलता की स्थिति में सीधे निजी अस्पतालों की ओर रुख करते थे। लेकिन पिछले तीन वर्षों में गुना जिला अस्पताल की रंगत ही बदल गई है। आज स्थिति यह है कि जब निजी अस्पताल हाथ खड़े कर देते हैं, तब जिला अस्पताल का प्रसूति वार्ड उन केसों को हाथ में लेता है और नई जिंदगी की किलकारी गुंजाता है। इस बड़े बदलाव के पीछे एक युवा चिकित्सक डॉ. सतीश राजपूत का अटूट समर्पण और अनुभव है। जब से उन्होंने प्रसूति वार्ड की कमान संभाली है, गुना जिले के लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति नजरिया ही बदल गया है। जिला अस्पताल के प्रति बढ़ते भरोसे को प्रसव के बढ़ते हुए आंकड़े खुद बयां करते हैं। वर्ष 2025 के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रसव की संख्या लगातार बढ़ी है।
कलेक्टर ने भी किया सार्वजनिक अभिनंदन
डॉ. सतीश राजपूत की कार्यकुशलता और जटिलतम आॅपरेशन करने की क्षमता की सराहना स्वयं कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल कर चुके हैं। एक बेहद जटिल मामले में, जब प्रसूता की जान बचाना असंभव लग रहा था, डॉ. राजपूत ने सफलतापूर्वक उपचार किया। इस प्रदर्शन से प्रभावित होकर कलेक्टर ने प्रशासनिक बैठक में सबके सामने डॉ. राजपूत का उत्साहवर्धन किया और जिला अस्पताल की टीम की सराहना की।
जब फर्ज के आगे फीका पड़ गया त्यौहार
डॉ. राजपूत के लिए उनका कर्तव्य ही सबसे बड़ा त्यौहार है। दीपावली के अवसर पर जब पूरा शहर खुशियां मना रहा था, तब वे अस्पताल में सूजाखेड़ी निवासी प्रसूता निकिता का जटिल आॅपरेशन कर रहे थे। गर्भ में शिशु की मृत्यु हो जाने के कारण महिला की जान को भारी खतरा था, जिसे डॉ. राजपूत ने अपनी सूझबूझ से टाला। इसी तरह, बमोरी की पिंकी भील के मामले में, जब प्रसूता का हीमोग्लोबिन महज 6% रह गया था, तब डॉ. राजपूत ने आधी रात को स्वयं रक्तदान कर मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की।
जटिलताएं नहीं बनतीं बाधा
ग्राम अमरपुरा की पपीता बाई का मामला हो, जिनका रक्तचाप 200 के पार पहुँच गया था और तीन बार पहले उनकी डिलीवरी खराब हो चुकी थी, या अन्य ऐसे मामले जहाँ आॅपरेशन ही एकमात्र रास्ता था; डॉ. राजपूत ने साबित किया है कि अगर चिकित्सक हताश न हो, तो चमत्कार संभव है।
निजी पर निर्भरता हुई कम
आज गुना जिला अस्पताल में जटिल आॅपरेशन होने लगे हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की निजी अस्पतालों पर आर्थिक निर्भरता खत्म हो गई है। डॉ. राजपूत के मार्गदर्शन में स्थानीय स्टाफ भी अब अधिक आत्मविश्वास के साथ काम कर रहा है। अस्पताल की स्वच्छता और मरीजों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता ने इसे जिले के लिए किसी वरदान से कम नहीं बनाया है। डॉ. सतीश राजपूत के नेतृत्व में गुना का प्रसूति वार्ड आज सेवा, सुरक्षा और विश्वास का नया मॉडल बन चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व करने वाला व्यक्ति संवेदनशील और समर्पित हो, तो सरकारी तंत्र भी निजी संस्थानों से बेहतर परिणाम दे सकता है।