गुना: महिला दिवस विशेष


सभ्य और संस्कारित समाज के निर्माण में प्राणों की आहुति दे गईं श्रीमती संतोष अरोरा

समय बड़ा बलवान है। निरंतर परिस्थितियों को बदलता है। हम जैसा चाहते हैं, संभवत: हमेशा नहीं होता है। कुछ ऐसी ही परिस्थितियां गुना शहर के सामने जब उत्पन्न हुर्इं, तब हमने प्रख्यात समाजसेवी और मृदुभाषी हृदय की धनी, मॉडर्न स्कूल गुना की संचालक श्रीमती संतोष अरोरा को खो दिया। निश्चित ही यह शहर के लिए बड़ी क्षति है। लेकिन समय का चक्र अपने हिसाब से चलता है और उसके आगे मनुष्य का वश नहीं है।

स्व. संतोष अरोरा आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी स्मृतियां, गुना जिले के सामाजिक परिदृश्य को सुंदर और मिलनसार बनाने में उनका योगदान हमेशा याद रहेगा। मॉडर्न चिल्ड्रन स्कूल जैसी सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थान को आज कौन नहीं जानता है। यह स्कूल गुना जिले की शैक्षणिक प्रगति का आधार स्तम्भ है। हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने मॉडर्न स्कूल से शिक्षा ग्रहण की और आज महत्वपूर्ण पदों पर तमाम निजी व सरकारी संस्थाओं में कार्यरत रहकर श्रीमती संतोष अरोरा के सपनों को साकार कर रहे हैं। कहने और लिखने के लिए शब्द कम पड़ सकते हैं कि स्व. श्रीमती संतोष अरोरा ने गुना जिला ही नहीं, बल्कि कहें कि सभ्य समाज के निर्माण एवं विकास में क्या-क्या योगदान दिया है? उनकी स्मृतिगाथा महान है और शब्दों में इतना सामर्थ्य ही नहीं है कि उसे व्यक्त किया जा सके। गुना जिले में वनवासी आश्रम का सपना श्रीमती संतोष अरोरा ने ही देखा। इसके बाद उन्होंने बताया कि सपनों को कैसे साकार किया जाता है। आज वही वनवासी आश्रम स्व. संतोष अरोरा के प्रयासों, उनके आर्थिक योगदान से संचालित है। मानवता को झकझोर देने वाली कोरोना महामारी के दौरान जब सरकारें लोगों तक राहत पहुंचाने में असमर्थ हो गर्इं, तब स्व. श्रीमती संतोष अरोरा ने ही हजारों लोगों तक भोजन पहुंचाया, उनकी कुशल-क्षेम हमेशा जानती रहीं। इस बात से पूरी तरह बेफिक्र होकर कि यह महामारी उन्हें भी चपेट में ले सकती है। उन्होंने लोगों का दुख और दर्द दूर करने के लिए स्वयं के प्राण भी दांव पर लगा दिए। जब संभव हुआ, जब जरूरत पड़ी स्व. श्रीमती संतोष अरोरा ने हमेशा पीड़ित मानवता और जरूरत मंदों को सहयोग दिया। इसी का परिणाम था कि शासन हो या प्रशासन या फिर सामाजिक संस्थाऐं, सभी ने श्रीमती संतोष अरोरा को यथोचित सम्मान दिया और प्रत्येक सामाजिक कार्यों में उन्हें अग्रणी स्थान मिलता रहा। खास बात यह भी रही कि श्रीमती संतोष अरोरा ने कभी जाति, धर्म या सम्प्रदाय को आधार मानकर कार्य नहीं किया, उन्होंने सिर्फ जरूरतमंद देखे, पीड़ित देखे और सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक समरसता का भाव देखकर नई मिसाल कायम की। उनके इस प्रयास से हमारे जनप्रतिनिधियों को भी सीखने की आवश्यकता है। जिस तरह उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया, वैसी मिसाल मिलना लगभग नामुमकिन है। गुना का दौरा कर चुके देश के महामहिम राष्टÑपति श्री रामनाथ कोविंद भी श्रीमती अरोरा के कार्यों की सराहना कर चुके हैं। ऐसा नहीं है कि स्व. श्रीमती संतोष अरोरा के पास सामाजिक उत्थान का सामर्थ्य आसानी से आया। बल्कि इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी स्मृतियां मन में संजोने वाले शहर के गणमान्य नागरिक बताते हैं कि श्रीमती संतोष अरोरा ने अपने दिवंगत पति हरभगवान अरोरा के साथ मॉडर्न चिल्ड्रन स्कूल की स्थापना की, तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह संस्था शिक्षा के क्षेत्र में नए-नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। आज गुना में मॉडर्न चिल्ड्रन स्कूल केवल एक विद्यालय नहीं है, बल्कि यहां संस्कारों और शिक्षा के उच्च स्तर का प्रमुख रूप से ध्यान रखा जाता है। आधुनिकता के साथ-साथ अगर अपने परिवार, समाज और देश से जुड़ाव की सही भावना सीखना हो तो मॉडर्न चिल्ड्रन स्कूल से अच्छा उदाहरण नहीं मिल सकता। शैक्षणिक संस्था की स्थापना के बाद स्व. श्रीमती संतोष अरोरा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने जानने वाले लोग दुखी हृदय से कहते हैं कि उनकी आवश्यकता इस जिले को, इस समाज को अभी और थी। लेकिन काल के चक्र की इस गति ने सभी को आहत कर दिया। उनका स्मरण आते ही मन व्यथित होता है, लेकिन संकल्प भी लेने के प्रेरित करता है कि स्व. श्रीमती संतोष अरोरा के दिखाए मार्ग पर चलकर ही संस्कारित, शिक्षित और सभ्य समाज की नींव रखी जा सकती है।