सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं को अब नहीं सताएगी गर्मी


गुना। सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत से परेशान छात्र-छात्राओं को कम से कम गर्मी से निजात मिल सक सकती है। लोक शिक्षण संचालनालय ने गुना सहित सभी जिलों को आदेश जारी किए हैं कि स्कूलों में अनिवार्य रूप से पंखे लगाए जाएं, ताकि छात्र-छात्राओं को भीषण गर्मी का सामना न करना पड़े।
गौरतलब है कि गुना जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों में पर्याप्त पंखे नहीं है। कुछ स्कूलों के हालात तो ऐसे हैं जहां गर्मी के दिनों में बच्चों को या तो दालान में बैठकर पढऩा पड़ता या फिर उन्हें स्कूल के बाहर पेड़ की छांव में कक्षाएं लगाने के लिए विवश किया जाता है। ऐसा नहीं है कि केवल छात्र-छात्राओं को गर्मी झेलने की विवशता है बल्कि शिक्षक-शिक्षिकाएं भी संसाधनों की कमी से परेशान हैं। लिहाजा लोक शिक्षण संचालनालय का यह आदेश बेहद उपयोगी और जरूरी साबित हो सकता है। संचालनालयल ने छात्र-छात्राओं को होने वाली परेशानी का जिक्र करते हुए कहा है कि स्कूलों में रोजाना 5.30 से 6.30 घंटे तक व्यतीत करने होते हैं। शीतकाल के 4 महीनों को छोड़कर शेष समय काफी गर्मी रहती है। गर्मी अधिक होने पर अध्ययन, अध्यापन के लिए अनुकूल वातावरण नहीं रह जाता है। गर्मी की समस्या के निदान के लिए मूल रूप से पंखों की आवश्यकता होती है। लेकिन विशेषकर पुराने स्कूलों में पंखे भी नहीं होते हैं।

एक कक्ष में कम से कम 2 पंखे
विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारी और सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के नाम जारी आदेश में कहा है कि प्रत्येक हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्रत्येक शिक्षण कक्ष एवं अन्य कक्षों में न्यूनतम 2 पंखे या आवश्यकता के मुताबिक ज्यादा पंखे लगाए जाएंगे। आवश्यकता अनुसार सीलिंग फैन या वॉल माउटिंग फेन का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही विभाग ने हिदायत दी है कि पंखों की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए। कम से कम 5 स्टार रेटिंग अर्थात् न्यूनतम ऊर्जा खपत वाला पंखा होना चाहिए। पंखों की फिटिंग के लिए विद्युत कनेक्शन व्यवस्था एवं स्विच भी अच्छी तरह लगाए जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पहुंच से दूर रहें, जिससे करंट आदि का खतरा न रहे। इसी के साथ विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस काम के लिए आावंटन योजना क्रमांक 9545 में उपलब्धतता बंटन से विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को जारी किया गया है।

एजेंसियों की जिम्मेदारी तय
शिक्षा विभाग पंखे लगवाने के लिए किसी तरह जटिलता का सामना न करने इसके लिए विभाग ने पूरी तरह दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि यह काम एसएमडीसी के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए एसएमएडीसी निर्माण एजेंसी के रूप में कार्य करेगी। जिसे आवश्यकता अनुसार राशि अग्रिम रूप से प्रदाय की जाएगी। यह कार्य अभियान के रूप में किया जाएगा और कृत कार्य में गुणवत्ता व समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यदि किसी भी समय विद्यालय में पूर्व से पंखे लगे हुए हैं तो उन्हें अलग से यह काम कराने की आवश्यकता नहीं होगी।

जहां बिजली नहीं, वहां क्या होगा?
लोक शिक्षण संचालनालय का आदेश सराहनीय है, लेकिन कई स्कूलों में इसे चुनौती के रूप में भी देखा जाएगा। दरअसल, गुना जिले के कई गांवों में स्थित सरकारी स्कूलों में बिजली या तो पूरी तरह नहीं है या फिर वहां बिजली प्रदाय नहीं होता है। ज्यादातर गांवों में तो दिन के समय कटौती ही रहती है। ऐसे में विभाग अगर पंखे लगवा भी देखा तो उसका पर्याप्त लाभ मिलना मुश्किल है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि विभाग को पंखे लगवाने के साथ ही छोटे इन्वर्टर की व्यवस्था भी करना चाहिए। ताकि निर्बाध रूप से बच्चों को पंखों की हवा मिलती रही और उन्हें गर्मी का सामना न करना पड़े।