कल्पना शर्माः मेधावी छात्रा से लेकर बालिका शिक्षा में योगदान तक का सफर
शिक्षा का बेहतर स्तर देश का भविष्य बदल सकता है। इनमें भी विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा से तो परिवारों में सम्पन्नता संभव है और सामाजिक स्तर में सुधार निश्चित ही आता है। इसीलिए आवश्यक है कि बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाए। बालिकाएं शिक्षित होकर एक नहीं दो कुनबे को गौरवान्वित करती हैं। यह कहना है शासकीय शिक्षिका श्रीमती कल्पना शर्मा का। शिक्षा के प्रति समर्पित श्रीमती कल्पना स्वयं अपने छात्र जीवन में मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में 12वीं कक्षा के कला संकाय में पूरे विदिशा जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया। तब बोर्ड परीक्षाओं को विद्यार्थी बड़ी चुनौती समझते हैं। निश्चित रूप से शिक्षा पद्धति में बदलाव आया है और परीक्षा से पहले मार्गदर्शन देने वाले शिक्षकों की सुविधा उपलब्ध है, साथ संचार माध्यमों से भी छात्र स्वयं के तनाव को कम कर सकते हैं। इसलिए अब बोर्ड परीक्षाओं में भी नतीजे अच्छे आते हैं। लेकिन कुछ दशक पहले यह संभव नहीं था। ऐसे में कल्पना शर्मा ने बेटियों का मानव बढ़ाते हुए विदिशा जिले की छात्राओं के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया। विदिशा जिले के गुलाबगंज मंडी निवासी श्री गोपाल दास शर्मा एवं श्रीमती गीता देवी शर्मा की सुपुत्री कल्पना शर्मा का विवाह गुना निवासी श्री महेश शर्मा से हुआ है। दाम्पत्य जीवन में कदम रखने के बाद कल्पना शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम करने का इरादा और मजबूत किया। वर्ष 1998 में शासकीय शिक्षिका के रूप में चयनित सरकारी विद्यालयों में उन छात्र-छात्राओं को मार्गदर्शन दे रही हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। श्रीमती कल्पना शर्मा बताती हैं कि बेटियों को शिक्षित करने के संबंध में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ भ्रांतियां हैं। लेकिन हमारी सरकारों और शिक्षा विभाग की नीतियां रंग ला रही हैं और बेटियां भी बड़ी संख्या में शिक्षित होकर समाज का गौरव बढ़ा रही हैं। शिक्षा के प्रति निरंतर जागरुकता के उद्देश्य से कार्य करते हुए कल्पना शर्मा ने अनेक बेटियों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए उनके अभिभावकों से चर्चा की और सफल भी हुई हैं। श्रीमती कल्पना शर्मा कहती हैं कि शिक्षा की अलख जगाने के उद्देश्य में उनके माता-पिता एवं पति का हमेशा सहयोग रहा। परिजनों की प्रेरणा से सामाजिक दायित्व का निर्वाहन बखूबी रही हैं। प्रयास है कि अधिक से अधिक बेटियों को शिक्षित करने में अपना व्यक्तिगत योगदान दें, ताकि हमारा समाज असली उन्नति जो कि शिक्षा से ही संभव है, उसे समझ सके। इसके लिए उनका संघर्ष निरंतर जारी है।