समाज को पूर्ण शिक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं श्रीमती सीमा शर्मा


वर्तमान परिवेश में महिलाओं की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्रों में अधिक बढ़ गई है। उन्हें अपने मूल दायित्व के साथ-साथ संस्कारी समाज के निर्माण का जिम्मा अकेले ही उठाना पड़ रहा है। इसके दो कारण है, पहला मातृत्व क्षमता होने के चलते महिलाओं की समझाइश का असर मानव मन पर सीधे पड़ता है। दूसरा महिलाएं सौम्य और सख्त दोनों छवि की धनी होती हैं, जिससे उनकी मार्गदर्शन क्षमता भी बढ़ जाती है। कहने का आशय समाज में एक साथ कई भूमिकाओं का निर्वाहन महिलाओं को करना पड़ता है। हाईस्कूल प्राचार्य श्रीमती सीमा शर्मा भी अपने दायित्वों का निर्वाहन भली-भांति कर रही हैं। श्रीमती सीमा शर्मा बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ प्रयास कर रही हैं कि ऐसे बच्चों को भी शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जाए, जो किसी कारण स्कूल आने में असमर्थ हैं।  हालांकि श्रीमती सीमा का सार्वजनिक जीवन में सफर आसान नहीं रहा है। जिस समय वह उज्जैन में पोस्ट ग्रेज्युऐशन कर रही थीं उसी दौरान उन्हें शासकीय सेवा का कॉल लैटर आया। उन्होंने सेवाकाल की शुरूआत पन्ना जिले के एक छोटे से गांव से 5 नवम्बर 1996 को की। लेक्चरर पद पर नियुक्ति के बाद 1 अगस्त 1994 को स्थानांतरण के चलते गुना के कैंट विद्यालय में ज्वाइनिंग दे दी। इसके बाद श्रीमती सीमा का प्रमोशन हुआ और 4 फरवरी 2012 को हाईस्कूल की प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिलने के साथ ही उन्होंने अपने परिवार और महिला समाज का नाम रौशन किया। मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में श्रीमती शर्मा के मार्गदर्शन में बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भागीदारी दर्ज कराई। श्रीमती सीमा का मुख्य उद्देश्य है कि शिक्षा के क्षेत्र से कोई भी बच्चा वंचित न हो। सामाजिक सरोकार के दायित्व को निभाते हुए वह कई बार स्वयं बच्चों को आर्थिक मदद प्रदान करती हैं, ताकि किसी बच्चे का स्कूल न छूटे और वह जीवन में शिक्षा रूपी अनमोल धरोहर से वंचित न रह जाए। वह निरंतर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। अभिभावकों से संवाद की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसके बाद बेटियों की शिक्षा को लेकर भी ग्रामीण नागरिकों को श्रीमती शर्मा जागरुक करती हैं और बेटियों के शिक्षित होने से समाज के शिक्षिक होने का संदेश भी दे रही हैं।