आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बोलीं, अभिभावकों से नहीं मांग सकते हैं ओटीपी


गुना। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को आए दिन चुनौतीपूर्ण कार्य सौंपे जा रहे हैं। इसके चलते कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। हाल ही में पोषण ट्रेकर एप में कई ऐसी जानकारियों को जोड़ा गया है जो निजी श्रेणी में आती हैं। खासकर ओटीपी लेने में कार्यकर्ताओं को परेशानी हो रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ ने विभिन्न परेशानियों से संबंधित एक ज्ञापन गुरुवार को कलेक्टर के नाम सौंपा है। जिसमें बताया गया है कि पोषण ट्रेकर एप को अपडेट करने के दौरान अभिभावक के मोबाइल का ओटीपी एक नहीं बल्कि दो बार मांगना पड़ रहा है। कई अभिभावक ओटीपी देने में आनाकानी कर रहे हैं। वहीं हाल-फिलहाल में ओटीपी की वजह से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड के चलते यह आशंका भी बनी हुई है कि ओटीपी देने वाले व्यक्ति से कोई ऑनलाइन धोखाधड़ी हो जाती है तो वह इसका जिम्मेदार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को ठहरा सकता है। इसी तरह फेस केप्सर और ई-केवायसी जैसे कई मुश्किल काम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर थोप दिए हैं। यहां भी परेशानी इस बात की है कि विभाग की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए गए मोबाइल इन तमाम कामों को तेजी के साथ करने में सक्षम नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ ने मांग की है कि सबसे पहले उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले मोबाइल उपलब्ध कराए जाएं। वहीं अभिभावकों से ओटीपी और आधार मांगने की बाध्यता को खत्म किया जाए। इसके अलावा हितग्राहियों को फोटो देने के लिए न कहा जाएगा। यह पूरा डाटा संवेदनशील है, जिसे कई लोग उपलब्ध कराने में असहज महसूस करते हैं। इसके अलावा मोबाइल खर्च के लिए 500 रुपए और भवन किराया राशि भी संघ ने मांगी है। बता दें कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य सरकार की ओर से लावा कम्पनी का मोबाइल उपलब्ध कराया गया है। इस कम्पनी के मोबाइल हाल-फिलहाल में आम उपभोक्ताओं ने इस्तेमाल करना बंद दिए हैं। जबकि महिला बाल विकास विभाग चाहता है कि इसी मोबाइल से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, फेस केप्चर, फॉर्म फिल, ई-केवायसी जैसे काम मिनटों में कम दें। इसलिए कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त बना हुआ है।