महिला दिवस विशेष


भील समाज और संपूर्ण अजा-अजजा वर्ग की महिलाओं का जीवन बदलने प्रयासरत हैं श्रीमती भीम बाई भिलाला

गुना जिले के छोटे से गांव सिमरौद की निवासी भीमबाई भिलाला का परिचय सामान्य नहीं है। सामान्यत: पिछड़े और अल्प शिक्षित समाज में शामिल भील समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भीम बाई भिलाला ने अजा-अजजा वर्ग की महिलाओं को नई राह दिखाई है। भील समाज में ऐसी महिलाओं एवं युवतियों की संख्या बेहद कम है, जिन्होंने ग्रेज्युएशन तक शिक्षा प्राप्त की है। भीम बाई भिलाला ने परिजनों के सहयोग और स्वयं की लगन से शिक्षा में रुचि दिखाई और अपने परिवार व समुदाय को गौरवान्वित किया है। इनके पिता भुवान सिंह भिलाला एवं माताजी श्रीमती अंतु बाई भिलाला एक सामान्य परिवार से आते हैं और पारिवारिक पृष्ठभूमि भी ऐसी नहीं थे, जिससे भीम बाई को आर्थिक या मानसिक संबल मिल सकता। लेकिन माता-पिता ने हमेशा आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया, कभी तरक्की व उन्नति में व्यवधान नहीं बने। साल 2018 में भीम बाई का विवाह पटवारी श्री सर सिंह भिलाला से हुआ है। इसके बाद भीम बाई ने अपने पति के सहयोग से महिला उत्थान के लिए काम करना शुरू किया। भविष्य के लिए इनकी योजना है कि अनुसूचित जाति-जनजाति और आदिवासी समुदाय की महिलाओं का जीवन स्तर सुधारना है। इसलिए वह भील जाति, अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना चाहती हैं। श्रीमती भीम बाई भिलाला बताती हैं कि समाज के पिछड़ेपन का मुख्य कारण उच्च शिक्षा की दिशा में आगे न बढ़ पाना है। अधिकांश भील समुदाय खेती या मजदूरी पर ही ध्यान देता है। उनके बच्चों को शिक्षित करने की दिशा में अभी जागरुकता का अभाव है। जिसे बातचीत और समझाइश के जरिए दूर किया जा सकता है। एक महिला होने के नाते भीम बाई मानती हैं कि महिलाएं और बेटियां ही परिवारों के जीवन स्तर में सुधार ला सकती हैं। इसलिए वह बेटियों को पढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने की सीख दे रही हैं। महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भले ही शासन ने तमाम योजनाएं बना दी हों, लेकिन जब तक उनका बेहतर प्रचार-प्रसार नहीं होगा और लोगों से संवादहीनता रहेगी, तब तक अपेक्षाकृत लाभ नहीं दिलाया जा सकता है। इसलिए उनका प्रयास है कि सबसे पहले शासकीय योजनाओं और शिक्षा के क्षेत्र में मिलने वाले अवसरों की जानकारी भील समाज को प्रदान करें। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में निरंतर काम हुआ है, लेकिन जिस स्तर पर समाज का पिछड़ापन दंश बनकर उभर रहा है, उसके लिए अतिरिक्त परिश्रम एवं संवाद की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचार के माध्यम पहुंचने से लोगों को जानकारियां तो मिल रही हैं, लेकिन जागरुकता का अभाव होने की वजह से वह उनका लाभ नहीं उठा पाते हैं। इसलिए भील समाज की बेटी होने के नाते श्रीमती भीम बाई भिलाला अपने समुदाय और अन्य अजा-अजजा वर्ग के उत्थान हेतु कार्य करना चाहती हैं।