महिलाओं को सशक्त या आत्मनिर्भर बनने की परिकल्पना को सही मायने में अर्चना दीक्षित साकार कर रही हैं। दरअसल, समाज को किसी भी काम की प्रेरणा तब मिलती है, जब प्रेरणादायी व्यक्तित्व स्वयं वह उदाहरण प्रस्तुत करें। वर्तमान में समय में महिलाओं को घरेलू कामकाज के अलावा वाणिज्य एवं व्यापार सहित विभिन्न सेवा क्षेत्रों में सक्रिय होने की आवश्यकता है। तभी महिला सशक्तिकरण संभव है। इस बात को अर्चना दीक्षित भली-भांति प्रमाणित कर रही हैं। मूलत: मध्यप्रदेश के ही भिण्ड जिले की रहने वाली अर्चना दीक्षित ने लम्बे समय तक गुना जिले में शिक्षा और आॅटोमोबाइल क्षेत्रों में महिलाओं का मान बढ़ाया और मिसाल कायम की है। आॅटो मोबाइल के एक बड़े शोरूम का प्रबंधन संभालने के दौरान उन्होंने सामाजिक सरोकारों को भी महत्वपूर्ण समझा है। शिक्षा के क्षेत्र में लोगों को जागरुक करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। विशेषकर रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर अर्चना दीक्षित प्रभावी तरीके से काम करते हुए बेटियों को इससे जुडऩे का संदेश देती हैं। सेवा और सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रमों व आयोजनों में अर्चना दीक्षित की उपस्थिति हमेशा देखी गई है। गरीब बस्तियों में शिक्षा जागरण हो, स्वास्थ्य सेवा या जरूरतों को आवश्यक वस्तुऐं उपलब्ध कराना, इन सभी कार्यों में अर्चना दीक्षित ने गुना शहर में अपना विशिष्ट योगदान देते हुए महिलाओं को प्रेरणा दी है। गौ सेवा के जरिए जीवदया का संदेश भी उन्होंने दिया है। गायों के चारे और भोजन की व्यवस्था के लिए 24 घंटे तत्पर रहती हैं। मूल जीवों के लिए उनका नरिया बेहद संवेदनशील है। कोरोना संक्रमण के दौरान शहर में जिन समाजसेवियों ने पीड़िता मानवता की सेवा की, उनमें अर्चना दीक्षित का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अर्चना दीक्षित के मुताबिक उनके पिता स्व. श्री रामस्वरूप दीक्षित और माताजी श्रीमती सुमनलता दीक्षित के आशीर्वाद से वह मानव और जीव सेवा में स्वयं के योगदान को सौभाग्यशाली अवसर मानती हैं। व्यवसायिक और शिक्षा के क्षेत्र में उन्हें मार्गदर्शन देने और उत्तरोतर प्रगति करने का श्रेय अपने मौसाजी श्री मोहनकांत समाधिया को देती हैं, जो निरंतर उनका सहयोग कर रहे हैं और प्रेरित करते हैं। अर्चना दीक्षित वर्तमान पीढ़ी विशेषकर महिलाओं से अपेक्षा करती हैं कि वह अपने बच्चों एवं परिजनों से जुड़े दायित्व अवश्य पूरे करें, साथ ही आत्मनिर्भर बनने का भी प्रयास करें।
महिला सशक्तिकरण की परिकल्पना को साकार कर रही हैं अर्चना दीक्षित
