कविता शर्मा: इनके लिए छात्र हित ही सर्वोपरि


कविता शर्मा: इनके लिए छात्र हित ही सर्वोपरि

एक शिक्षक का दायित्व होता है कि वह समाज को शिक्षित करे और राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका का निर्वाहन करे। श्रीमती कविता शर्मा पत्नि अरविन्द शर्मा ने इस जिम्मेदारी को निभाते हुए हमेशा छात्र हित ही सर्वोपरि माना है। मूलत: शिवपुरी जिले की रहने वालीं कविता शर्मा का विवाह राघौगढ़ क्षेत्र के समाजसेवी और पंचायत सचिव श्री अरविंद शर्मा से हुआ है। वैवाहिक जीवन आरंभ करने के बाद से ही श्रीमती कविता शर्मा ने शासकीय सेवा की जिम्मेदारियों का भी उसी तरह निर्वाहन किया है, जैसा कि पारिवारिक दायित्वों का निर्वाहन। एक महिला और शिक्षक होने के नाते वह अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझती हैं। शाला परिसर में वातावरण अनुकूल बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को मार्गदर्शन देना और उन्हें शिक्षित बनाने के साथ-साथ अच्छे नागरिक का निर्माण करने में भी उनकी महती भूमिका है। श्रीमती शर्मा कहती हैं कि उनके परिजनों के सहयोग से उन्होंने शासकीय सेवा और पारिवारिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। कहीं किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। श्रीमती कविता शर्मा के पिता श्री रामस्वरूप शर्मा और माताजी श्रीमती सीता शर्मा से मिले संस्कारों की वजह से उन्होंने हमेशा चुनौतियों का मुकाबला करने का प्रयास किया है और सफल भी रही हैं। समय का प्रबंधन और अध्यापन को रुचिकर बनाने का हुनर भी उन्हें आता है। शाला में बच्चों को शैक्षणिक मार्गदर्शन देने के दौरान संस्कारित शिक्षा देने पर वह जोर दे रही हैं। उनका मानना है कि शाला में मिली सीख बच्चे कभी नहीं भूलते हैं। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई अभिभावकों को बेटी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया है। स्वयं का उदाहरण देते हुए श्रीमती शर्मा कहती हैं कि बेटियां दो परिवारों ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को संस्कारित बनाती हैं। शिक्षक बनने के बाद उन्होंने एक संस्कारित परिवार में कदम और उन्हीं संस्कारों की खूशबू को अपने शाला परिसर और समाज में भी बिखेरा है। आधुनिक शिक्षा पद्धति की समर्थक होने के साथ-साथ श्रीमती शर्मा पारिवारिक ताने-बाने को भी महत्व देती हैं। वह कहती हैं कि परिवार के बिना व्यक्ति का जीवन असहाय है, सबसे पहले परिवार को प्राथमिकता दें इसके बाद समाज की चिंता करें। निश्चित रूप से इस मनोभाव के साथ हम एक अच्छे और संस्कारित समाज का निर्माण कर सकेंगे। परिवार और शाला परिसर में मिलने वाले सहयोग के लिए वह ईश्वर को धन्यवाद देती हैं और प्रार्थना करती हैं कि लोगों के कष्ट को प्रभु दूर करें और हर किसी को निरोगी बनाएं। श्रीमती शर्मा कहती हैं कि गर्व है कि वह एक महिला होने के शिक्षक हैं और अपने दायित्वों को बखूबी समझती हैं।