घनश्याम सिंह रघुवंशी का जीवन यात्रा असाधारण है। उनका व्यक्तित्व, विचार और संघर्ष उन युवाओं के लिए सीख है जो अचानक सबकुछ प्राप्त कर लेना चाहते हैं। उन्हें घनश्याम रघुवंशी से सीखना चाहिए कि परिश्रम और लगनशीलता से ही सुनहरा भविष्य निर्मित हो सकता है, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है। घनश्याम रघुवंशी एक सक्रिय समाजसेवी हैं, साथ ही अखिल भारतीय रघुवंशी क्षत्रिय महासभा के जिला अध्यक्ष का दायित्व भी उन्हें प्राप्त है। गुना और अशोकनगर जिलों के जाने-माने सीमेन्ट व्यवसायी ने सेजी (शाढ़ौरा) जैसे छोटे से गांव से निकलकर गुना का रुख किया और कड़ा परिश्रम करते हुए अपने व्यवसाय को उच्च आयाम दिए हैं। पूरा परिवार कृषि आधारित रहा है, लिहाजा एक कृषक की तरह संघर्ष घनश्याम के जीवन में हमेशा समाहित रहा है। घनश्याम रघुवंशी ने कार्यव्यवहार में समाहित किया है कि जीवन का हर पल संघर्ष है, इससे जूझते रहना होगा। इनकी विशेषता है कि कभी सीखने की प्रवृत्ति को पीछे नहीं छोड़ते हैं, जो भी मिलता है उसकी क्षमता, विचार, कार्यप्रणाली अथवा योग्यता की विशेषताओं को ग्रहण करते हैं। एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले घनश्याम रघुवंशी ने गुना जैसे शहर में प्रतिस्पर्धा की परवाह करते हुए असाधारण सफलताएं प्राप्त की हैं।
सामान्य परिचय एवं पारिवारिक पृष्टभूमि
घनश्याम रघुवंशी की प्रारंभिक शिक्षा तत्कालीन संयुक्त गुना-अशोकनगर जिले के ग्राम सेजी में हुई है। इनके पिता श्री जवाहर सिंह रघुवंशी मेहनकश कृषक रहे हैं, बड़े भाई शिक्षक हैं और छोटे भाई गांव में ही निवास करते हुए कृषि कार्य में जुटे हुए हैं। गांव में शिक्षा के पर्याप्त संसाधन नहीं थे, इसलिए घनश्याम सिंह रघुवंशी को गुना आकर अध्ययन करना पड़ा और पोस्टग्रेज्युशन तक की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में न्यू सिटी कॉलोनी में निवास करते हैं, इनका संस्थान तरुण एजेंसी शिक्षा विभाग के पास संचालित है।
शुरुआत से शिखर तक
घनश्याम रघुवंशी की जीवन यात्रा रोमांचक है और प्रेरणादायी भी। साल 1993 में हायर सेकेण्डरी कक्षा में अध्ययन करते ही इन्होंने अपने चचेरे भाई श्री महेश रघुवंशी के साथ सीमेन्ट व्यवसाय की बारीकियां सीखना शुरु कीं। बिटिया विशाखा का जन्म घनश्याम रघुवंशी के जीवन बड़ा पड़ाव रहा। तब स्वयं का व्यवसाय करने की आवश्यकता महसूस हुई। सीमेन्ट व्यवसाय को पूरी तरह बारीकी से समझने के बाद घनश्याम को अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा हुआ तो इन्होंने साल 2007 में सीमेंट व्यवसाय शुरु किया। हालांकि यह इतना आसान नहीं था। घनश्याम रघुवंशी बताते हैं कि एक नए व्यवसायी को कितनी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, इसका अहसास उन्हें तब हुआ, जब व्यवसाय के लिए प्रधानमंत्री रोजगार योजना से ऋण लेने लगभग एक वर्ष तक बैंकों के चक्कर काटने पड़े। हालांकि शुरुआत से सोच रही है कि प्रयास करने से सफलता मिलती और ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी विफल नहीं होता है। इसलिए डटे रहे और व्यवसाय शुरु कर दिया। साल 2008 में इन्हें मायसैम सीमेंट की डीलरशिप मिली, शुरुआत केवल एक हजार बोरी से हुई। लेकिन दो वर्ष बाद ही 10 गुना सफलता के साथ सेल को 10 से 12 हजार बोरी प्रतिमाह तक पहुंचा दिया। इसके बाद कम्पनियों ने भी घनश्याम रघुवंशी की योग्यता को परखा। वर्ष 2014 में रिलायंस ने अपना सीमेन्ट लॉन्च किया तो उन्होंने घनश्याम रघुवंशी को प्राथमिकता देते हुए गुना एवं अशोकनगर जिलों का डिस्ट्रीब्यूटर नियुक्त किया। घनश्याम ने कम्पनी की अपेक्षाओं से बढ़कर व्यवसाय किया। ऐसा कैसे कर पाए? इस पर विचार व्यक्त करते हुए घनश्याम रघुवंशी बताते हैं कि उन्होंने हर किसी का सम्मान किया। छोटा हो, बड़ा हो, मजदूर हो या मालिक सभी को समान व्यवहार के साथ आदर देते हैं। सबका सहयोग मिला और मेहनत तो वह करते ही थी। इसलिए रुकावटें नहीं आईं और सफलताएं मिलती गईं। हालांकि व्यवसाय की शुरुआत में इनके बड़े भाई महेश रघुवंशी ने मार्गदर्शन दिया। जब स्वयं का व्यवसाय शुरु किया तो संजय भार्गव से मदद मिली। फिर कार्य करते रहे और आगे बढ़ते गए।
सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन
किसी भी सफल व्यक्ति की पहचान उसके व्यवसाय के साथ-साथ सामाजिक जीवन से भी होती है। घनश्याम रघुवंशी का सामाजिक जीवन भी व्यापक रहा है। वर्तमान में शतरंज संघ के जिला अध्यक्ष हैं। अखिल भारतीय रघुवंशी क्षत्रिय महासभा जैसे विशाल संगठन के जिला अध्यक्ष हैं। इससे पहले भारत विकास परिषद के कोषाध्यक्ष रहे और रोटरी क्लब में भी काम किया। श्रीराम चरित मानस संगोष्ठी एवं गौसेवा समिति से इनका लगाव पिछले 5 वर्षों से रहा है। यह अनोखी संस्था है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक महाग्रंथ श्री राम चरित मानस और श्रीमद् भगवत गीता के अध्ययन को जारी रखने में योगदान दे रहा है। इसके लिए संस्था के सदस्य माह में किसी भी एक रविवार को गांवों में पहुंचते हैं और केवल 50 प्रतिशत राशि में श्रीमद् भगवत गीता व श्रीराम चरित मानस ग्रामीणों को उपलब्ध कराते हैं। इसी दौरान संगोष्ठी का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें ग्रामीण अपने विचार रखते हैं और धार्मिक ग्रंथों पर चर्चा होती है। घनश्याम रघुवंशी बताते हैं कि पूरा समाज ही मार्गदर्शक होता है, इसलिए लोगों के बीच रहना और उनसे चर्चा करना अच्छा लगता है। परिवार के साथ कुछ समय बिताना भी प्रसन्नता की अनुभूति देता है। धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर जाना उन्हें अच्छा लगता है। अब तक आधे से ज्यादा भारत का भ्रमण कर चुके हैं।