अव्यवस्थाओं के बीच खरीदी जारी, फिर भड़के किसान


गुना। जिले में बुधवार को बदले मौसम के मिजाज ने अपनी गाढ़ी कमाई की फसल बेचने आए किसानों की परीक्षा ले ली। सुबह हुई तेज बारिश के बाद कृषि उपज मंडी की अव्यवस्थाओं का अंबार लग गया। खरीदी की प्राथमिकता को लेकर किसानों और व्यापारियों के बीच उपजे विवाद ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और मामला सुलझाने के लिए घंटों समझाइश का दौर चला।
बुधवार की सुबह करीब 8 बजे जिले में अचानक आसमान बादलों से घिर गया और तेज बारिश शुरू हो गई। इस बारिश ने मंडी प्रबंधन की उन तमाम तैयारियों की पोल खोल दी, जिनके बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। चूंकि मंडी परिसर में जगह कम थी, इसलिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को बीज निगम परिसर के मैदान में खड़ा करवाया था। बारिश होते ही बीज निगम की काली मिट्टी वाला विशाल मैदान कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गया। वहाँ मौजूद किसानों के बीच अपनी फसल को बचाने की होड़ मच गई। यहाँ किसानों ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। अधिकांश किसान पहले से तिरपाल साथ लाए थे, जिन्होंने तुरंत अपनी ट्रॉलियों को ढंक दिया। फसल के अंदर पानी न घुसे, इसके लिए किसानों ने एक विशेष तकनीक अपनाई। उन्होंने अपनी ट्रॉलियों के हाइड्रोलिक का उपयोग कर उन्हें ऊपर की ओर तिरछा कर दिया, जिससे तिरपाल पर जमा पानी तेजी से नीचे गिर गया और फसल के नीचे नमी जमा नहीं हो पाई। इस जुगाड़ से किसानों ने अपनी फसल को भीगने से बचा लिया।

खरीदी को लेकर उपजा विवाद
विवाद उस समय शुरू हुआ जब बारिश थमी और व्यापारी बोली लगाने पहुँचे। बीज निगम में फंसे किसानों को डर था कि कीचड़ बढ़ने से उनके ट्रैक्टर वहाँ लंबे समय तक फंस सकते हैं और मौसम फिर बिगड़ सकता है, इसलिए उन्होंने व्यापारियों से पहले अपनी बोली लगाने का दबाव बनाया। दूसरी ओर, कतारबद्ध खड़े अन्य किसान इस बात पर अड़ गए कि खरीदी नियम के अनुसार होनी चाहिए। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते हंगामे को देखते हुए पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ। पुलिस अधिकारियों ने विवाद कर रहे किसानों और व्यापारियों को पुलिस कंट्रोल रूम ले जाकर बैठक की। घंटों चली समझाइश के बाद यह तय हुआ कि खरीदी पूरी तरह नियमानुसार ही होगी।