मदन सोनी: संचालक, नारायण गहने गुना


100 टंच विश्वास और गुणवत्ता का केंद्र है नारायणी गहने
गुना में डायमण्ड आभूषण लाने वाले पहले कारोबारी हैं मदन सोनी

आभूषण खरीदते समय हमेशा 100 टंच की बात होती है। इसका आशय गुणवत्ता से है। कुछ यही समीकरण जीवन व्यवहार में भी लागू होते हैं, जहां विश्वास का प्रतिशत भी अधिक से अधिक होना चाहिए। गढ़ा कॉलोनी स्थित नारायणी गहने के संचालक मदन सोनी ने अपने आभूषणों में सर्वाधिक गुणवत्ता और भरोसे में 100 टंच खरा उतरने के सिद्धांत को अपने जीवन में अपनाया है। जिस हॉलमार्क पद्धति के जरिए हम आज स्वर्ण आभूषण में 90 प्रतिशत गारंटी को पुख्ता मानते हैं, इस गुणवत्ता के आभूषण मदन सोनी साल 2000 से गुनावासियों को उपलब्ध कराते आए हैं। बदरवास तहसील के डुंगासरा निवासी प्रसिद्ध स्वर्ण आभूषण कारोबारी परिवार में जन्मे मदन सोनी ने इंजीनियरिंग करने के बावजूद इस व्यवसाय को प्राथमिकता में लिया। डुंगासरा परिवार की कई पीढिय़ों ने आभूषण खरीदने वाले उच्च से लेकर निम्न वर्ग की पूंजी को आभूषणों के रूप में सहेजने का काम किया है। सोने में 90 प्रतिशत और चांदी के आभूषणों में 80 प्रतिशत की गारंटी नारायण गहने परिवार हमेशा देता आया, जिसका प्रमाणिकता की पुष्टि गुना शहर के आसपास लगभग 100 किलोमीटर दायरे से यहां आभूषण खरीदने वाले ग्राहक भी करते हैं। एक व्यवसायी होने के अलावा मदन सोनी ने सामाजिक क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया है। इस व्यवसायी ने प्रयास किया है कि उनके कार्यव्यवहार से कोई निराश न हो। जब भी अवसर मिला है लोगों की सेवा की। मदन सोनी ने अपनी मेहनत से नारायणी गहने को केवल संस्थान नहीं, बल्कि भरोसेमंद संस्थान के रूप में विकसित किया है यह इस युवा व्यवसायी के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। गुनावासी गर्व से कहते हैं कि आभूषणों की गुणवत्ता के लिहाज से हमारे पास भी ऐसा संस्थान है, जिसे किसी हॉलमार्क की आवश्यकता नहीं है।

सामान्य परिचय एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
मदन सोनी का जन्म डुंगासरा के प्रतिष्ठित आभूषण व्यवसायी परिवार में 28 दिसम्बर 1970 को हुआ है। इनके पिता श्री देवीचरण जी सोनी आभूषण कारोबार करते थे। मदन सोनी बताते हैं कि उनकी स्मरण क्षमता के मुताबिक वह तीसरी पीढ़ी के सदस्य हैं, जो आभूषण कारोबार से जुड़े हुए हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा डुंगासरा में ही हुई। इसके बाद एक वर्ष तक शिवपुरी और एक वर्ष गुना में अध्ययन किया। बाद में सिविल इंजीनियर बनने के लिए इंदौर के वैष्णव इंस्टीट्यूट में दाखिला ले लिया। वर्ष 1992 में इंजीनियर की डिग्री प्राप्त कर ली थी। मदन सोनी का परिवार ज्वेलर्स के अलावा उच्च शिक्षित भी है, जिसके सदस्य वर्तमान में बड़े-बड़े पदों पर आसीन हैं। इनकी बहन रंजना सोनी भोपाल में कॉमर्शियल टैक्स ऑफिसर के रूप में पदस्थ हैं। मदन सोनी के चचेरे भाई श्री धर्मेन्द्र सोनी इंदौर में जिला न्यायाधीश हैं। कुछ समय पहले इंदौर के सर्वाधिक चर्चित भैयू जी महाराज हत्याकाण्ड में श्री धर्मेन्द्र सोनी ने ही निर्णय सुनाया था, जिसे देश के ऐसे प्रकरणों में शामिल माना जाता है, जो हाईप्रोफाइल था और सत्यता सामने लाने के लिए पूरे देश की निगाहें कोर्ट पर टिकी हुई थीं। मदन सोनी के चाचाजी श्री मोहन सोनी देश के जाने-माने सर्जन हैं। कुछ ही समय पहले केंद्र सरकार ने दिल्ली के अशोका इंटरनेशनल होटल में आयोजित एक समारोह के दौरान उन्हें तीन वर्षों की अवधि में सर्वाधिक डेढ़ लाख एलटीटी ऑपरेशन करने की उपलब्धि हासिल करने पर सम्मानित किया। वर्तमान वर्ष में ही डॉ. मोहन सोनी 14 हजार ऑपरेशन कर चुके हैं। इनके चाचा आज भी बदरवास में डुंगासरा परिवार की परम्परा का निर्वाहन करते हुए स्वर्ण आभूषणों का कारोबार करते हैं और मदन सोनी ने गुना में परिवार की 60-70 वर्ष पुरानी व्यवसायिक परम्परा को जारी रखा है।

शुरुआत से शिखर तक
मदन शुरुआत हमेशा ही व्यवसाय में ईमानदारी और आधुनिकता को महत्व देते आए हैं। हालांकि उनका प्रयास आईपीएस अधिकारी बनने का था। लेकिन पारिवारिक परिस्थितियां या जिम्मेदारियों का निर्वाहन करने की वजह से उन्हें ऐसा कर पाना संभव नहीं लगा। 22 अक्टूबर 2000 को गुना की गढ़ा कॉलोनी में नारायणी गहने की नींव मदन सोनी द्वारा रखी गई। तब गुना में मदन सोनी का कोई बैकग्राउंड नहीं था। इसलिए स्वर्ण आभूषण संस्थान संचालित करना मुश्किल भी माना गया। मदन सोनी ने व्यवसाय को आधुनिक पद्धति से संचालित किया। यह दौर बड़ा खास था, जब गुना का आभूषण बाजार मूलत: सदर बाजार और इसके आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता था। ऐसे में गढ़ा कॉलोनी में आभूषण की दुकान चलाना थोड़ा विचित्र निर्णय माना गया। लेकिन जब मदन सोनी ने इस संस्थान को एक अलग सोच और अलग तरीके से संचालित किया तो इस क्षेत्र को आभूषण व्यवसाय को एक नई उड़ान मिली। अब हाट रोड और गढ़ा कॉलोनी में ही कई संस्थान संचालित होते हैं। मदन सोनी बताते हैं कि वह नारायणी गहने का संचालन अपने भाई प्रभात सोनी (आशीष) और चाचाजी श्री चिंतामणी सोनी के सहयोग से कर रहे हैं। नारायणी गहने पर काम करने वाले 8 कारीगर इस संस्थान का अभिन्न अंग हैं। यहां के बने आभूषण नारायणी ब्रांड के नाम से मशहूर हैं। नारायणी गहने की शुरुआत हुई तब मदन सोनी ने गुना में कई नवाचार किए। कुछ नामी कम्पनियों के साथ स्वर्ण आभूषण की प्रदर्शनी लगाई। जाहिर है गुना जैसे छोटे शहर में कम्पनियां माल बेचने से कतराती थीं, लेकिन मदन सोनी की दूरदृष्टि की वजह से उन्हें प्रदर्शनी लगाना पड़ी, जो इस संस्थान की अब तक की बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। ऐसा एक नहीं बल्कि तीन बार किया गया, जब गुना में स्वर्ण व डायमण्ड आभूषण की प्रदर्शनी लगाई गई हो, जिसमें अच्छा रिस्पॉन्स मिला। हालांकि गुना शहर के नागरिकों को स्मरण है कि तब वह कम्पनियों के नाम से नहीं, बल्कि यह जानकार प्रदर्शनी में जाते थे कि नारायणी गहने का यह आयोजन है। इस घटना से पता चलता है कि इस संस्थान के प्रति गुनावासियों का भरोसा कितना दृढ़ रहा है। मदन सोनी बताते हैं कि साल 2008 में उन्होंने पहली बार गुना में डायमण्ड बेचा। आप कितने भी बड़े कारोबारी क्यों न हों, लेकिन लोगों की जमा पूंजी डायमण्ड बेचकर खर्च कराना, उस समय बड़ी टेढ़ी खीर थे। मगर आभूषणों को लोगों ने खरीदा था और उसकी गुणवत्ता भी परख ली थी, इसलिए डायमण्ड का कारोबार हमने शुरु किया तो चल निकला और अब तक गुना में कई लोग इस कारोबार से जुड़ गए हैं। कुल मिलाकर गुना को आभूषण खरीदना ही नारायणी गहने ने सिखाया है। इस भरोसे को हासिल करने का श्रेय मदन सोनी अपने पिता और दादाजी को देते हैं, जिन्होंने सिखाया था कि वर्ण आभूषण सम्पन्न वर्ग भी खरीदता है और किसान भी। हर तबका विवाह आयोजन, अपने शौक या जमा पूंजी सुरक्षित करने के लिए आभूषण लेता है। उनके साथ विश्वासघात न करते हुए हमें विश्वास पर खरा उतरना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ नारायणी गहने को संचालित किया है और उन्हें प्रसन्नता है कि अपने प्रयास में वह निरंतर सफल भी हुए हैं। तब से अपने काम का निरंतर विस्तार कर रहे हैं। भविष्य में योजना है कि गुना में मैन्युफेक्चिरिंग युनिट डाली जाए। ताकि स्वर्ण खरीदने वाले दुकानदारों को गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का रुख न करना पड़े। यदि माल गुना में ही मिलेगा तो मुमकिन है कि गुणवत्ता में और निखार आएगा व ग्राहकों को भी कुछ रियायत मिल सकेगी। यह कार्ययोजना उनके दिमाग में है और प्रयास रहेगा कि जल्द ही इसे अमलीजामा पहनाया जा सके। नारायणी गहने संस्थान सोने-चांदी के अलावा कुंदन, मोती और हीरे भी उच्च गुणवत्ता के साथ लोगों को उपलब्ध कराता है।

सामाजिक और अन्य गतिविधियां
मदन सोनी ने व्यवसायिक क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल किया है तो सामाजिक उपलब्धियां भी कम नहीं हैं। वर्तमान में लायंस क्लब गुना सिटी के कोषाध्यक्ष हैं। लायंस क्लब नेत्र चिकित्सालय का भी संचालन करता है। जिसके जरिए विभिन्न गतिविधियों में मदन सोनी का भी योगदान है। पिछले 20 वर्षों से निरंतर सक्रिय रहते हुए मदन सोनी समाज और पीडि़त मानवता के लिए काम कर रहे हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश स्वर्णकार समाज कल्याण समिति के गुना जिला अध्यक्ष का दायित्व इनके पास है। सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में मदन की निरंतर सहभागिता रहती है। सेवा गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं। साल 2000 से व्यवसाय संभालने के बाद उसे ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए इनकी स्पष्टवादिता और ईमानदारी सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। लोगों की तकलीफें और उनकी समस्याओं को अपना समझते हैं। प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार भी दिया जा सके। बंगाल से आए कारीगर इनके पास काम करते हैं। नारायणी गहने ऐसे आभूषणों का निर्माण करता है, जिसकी कल्पना आप इंदौर और भोपाल जैसे शहरों की तर्ज पर कर सकते हैं। लोगों का सहयोग और शुभकामनाएं मदन के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

तब लगा नया जीवन मिला हो
मदन सोनी अपने व्यवसाय को निरंतर गति दे रहे थे। तभी साल 2008 में अस्वस्थ होने की वजह से जटिलताएं आ गईं। लगभग 3 वर्षों तक मदन सोनी कभी इंदौर, कभी गुडग़ांव तो कभी अन्य शहरों के अस्पताल में भर्ती रहे। अपने अनुभव स्मरण करते हुए मदन सोनी बताते हैं कि स्वस्थ होने के बाद लगा कि मानो दूसरा जीवन मिला हो। लेकिन धीरे-धीरे व्यवसाय को संभाला है, पुराने ग्राहक भी वापस आने लगे हैं। ग्राहक की संतुष्टि पर प्रसन्नता मिलती है, यही मेरी उपलब्धि भी है।