किसी संस्थान का संचालक होना मात्र आपकी काबिलयित और जिम्मेदारियों का भरपूर निर्वाहन नहीं है। व्यक्ति का संपूर्ण व्यक्तित्व तभी उभरता है, जब अपने साथ-साथ परिवेश, समाज व कम से कम एक पीढ़ी के उत्थान में स्वयं को झोंक दे। गुना का प्रेसीडेंसी हायर सेकेण्डरी आज जिस मुकाम और ऊचाइयों पर पहुंचा है, उसके पीछे एक नहीं बल्कि दो पीढिय़ों के कड़े परिश्रम और स्वयं को समर्पित करने की कहानी छुपी हुई है। हरीश लाम्बा ने इस विद्यालय को आधुनिकीकरण के दौर से जोड़ा, निजी विद्यालयों की श्रेणी में अग्रणी बनाया। लेकिन इस बात का भी पूरा ध्यान रखा कि जिस मंशा के इस विद्यालय की स्थापना उनकी माताजी श्रीमती वीणा लाम्बा द्वारा की गई थी, उस उद्देश्य से बिल्कुल भी भटकाव न हो जाए। हरीश लाम्बा ने न केवल प्रेसीडेंसी विद्यालय का संचालन किया है, बल्कि गुना शहर के विकास में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बात चाहे कोरोना संक्रमण में लोगों की मदद की हो, शहर की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा हो या फिर सामाजिक योगदान देने का विषय ही क्यों न हो, हरीश लाम्बा हर क्षेत्र में स्वयं को प्रमाणित कर चुके हैं। साल 2022 में प्रेसीडेंसी विद्यालय के 71 छात्रों ने हायर सेकेण्डरी बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए और उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा लैपटॉप खरीदने हुए 25-25 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई है। हरीश के निर्देशन में प्रेसीडेंसी विद्यालय की उपलब्धियों की वजह से विद्यालय को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह में एक लाख रुपए के नगद पुरुस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
विद्यालय के लिए व्यक्तित्व निर्माण
हरीश लाम्बा कहते हैं कि विद्यालयों में शिक्षा तो मिलती है और मूल दायित्व भी एक शिक्षक और संस्था यही है, लेकिन प्रेसीडेंसी विद्यालय छात्रों के साथ-साथ ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करता है, जिसकी समाज को आवश्यकता है। हरीश लाम्बा द्वारा संचालित प्रेसीडेंसी विद्यालय की स्थापना साल 2002 में उनकी माताजी और शहर की समाजसेविका श्रीमती वीणा लाम्बा ने उस समय रखी, जब गुना शहर में गिने-चुने अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूल थे। प्रेसीडेंसी स्कूल प्रारंभ से ही पूर्णत: अंग्रेजी माध्यम में संचालित है। हरीश लाम्बा ने विद्यालय की बागडोर संभालते ही इसे और निखारा व ऊचाइयों तक पहुंचाया। प्रेसीडेंसी विद्यालय में अध्ययन पूर्ण कर चुके और अध्ययन कर रहे छात्र प्रदेश और जिला स्तर की मैरिट सूची में निरंतर स्थान बनाते आए हैं। यह निर्धारित है कि मैरिट सूची जारी होते ही प्रेसीडेंसी का नाम अवश्य शामिल होगा। विद्यालय में सांस्कृतिक, वैज्ञानिक एवं खेलकूद गतिविधियां भी संचालित होती है। युवा संचालक हरीश लाम्बा ने अपने छात्र-छात्राओं का हर परिस्थिति में ध्यान रखा है। उन्होंने कोरोना संक्रमण के दौर में ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम से छात्रों को शिक्षा से जोड़े रखा। इसका परिणाम भी सुखद आया कि छात्रों ने प्रावीण्य सूची में स्थान बनाते हुए साबित कर दिया कि उनकी नींव मजबूत है, जो कुछ विपरीत परिस्थितियों के सामने आने पर कमजोर नहीं होने वाली। हरीश लाम्बा बताते हैं कि विद्यालय की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान हमारे दीर्घकालीन स्टाफ का है। यहां के शिक्षक केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि समय-समय पर बच्चों से चर्चा करते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हैं, विषयों पर मार्गदर्शन देते हैं। प्रेसीडेंसी विद्यालय पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। 70 एचडी कैमरों की मदद से बच्चों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है। इस विषय पर हरीश इतने सजग हैं कि उन्होंने पुलिस प्रशासन के आव्हान पर भी दो अतिरिक्त कैमरे लगवाए। चयनित कैटेगरी में शामिल बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण भी प्रेसीडेंसी विद्यालय कर चुका है। प्रेसीडेंसी विद्यालय प्रतिवर्ष बाल विज्ञान कांग्रेस कार्यशाला का आयोजन करता है।