अतुल जग्गी: कारोबार ऐसा किया, जिसने लोगों की जिंदगी बदल दी


अतुल जग्गी! अतुल नानकचंद जग्गी! यह नाम गुना जिले में पहचान, परिचय और प्रसिद्धि का मोहताज नहीं है। लगातार विकास के रास्ते पर अग्रसर हो रहे गुना शहर की किसी भी विकसित कॉलोनी में खड़े हो जाइए, लोग कह देंगे कि उनकी जिंदगी बदलने में अतुल जग्गी का बड़ा योगदान है। इतना ही नहीं गुना की विकासयात्रा जब भी बखान की जाएगी, अतुल जग्गी को उससे अलग रखना लगभग नामुमकिन है। आप गुना शहर की न्यूसिटी, विंध्याचल और वीआईपी कॉलोनियों को यहां की शान के रूप में पहचानते हैं। इन्हें विकसित करने वाला और कोई नहीं बल्कि अतुल जग्गी ही हैं। जिन मकानों की कीमतें आज आसमान छू रही हैं, उन्हें धरातल से ऊपर तक ले जाने का काम भी अतुल जग्गी ने ही किया है। इस शख्स ने गुना शहर को ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान किया, जहां से विकास नाम की गाड़ी सपरट अपनी मंजिल की ओर दौड़ रही है। हालांकि यह सब इतना आसान नहीं था। अपने लगभग 30 वर्ष के सफरनामे में अतुल जग्गी को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन अतुल मानते हैं कि माता-पिता के आशीर्वाद और परमात्मा की कृपा ने उन्हें हर परेशानी से बाहर निकाला है। क्योंकि उद्देश्य हमेशा भलाई करना था, ईमानदारी से काम करना था और प्रयास प्लॉट बेचने का नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को उसके सपनों का आशियाना उपलब्ध कराने का रहा। जिसमें वह अपने परिवार के साथ अपनी दुनिया बसाए और उसका जीवन आसान हो जाए। नेक नियत के साथ रियल एस्टेट कारोबार करने वाले अतुल जग्गी ने कभी नुकसान और फायदे का आंकलन किया ही नहीं है।

सामान्य परिचय और पारिवारिक पृष्ठभूमि
अतुल जग्गी का परिवार मूलत: गुना का ही निवासी है। इनका जन्म 25 मई 1967 को गुना में ही हुआ है। अतुल के पिता श्री नानकचंद जग्गी गुना के प्रसिद्ध ग्रेन मर्चेन्ट व्यवसायी रहे हैं। अतुल के दादाजी स्व. श्री रामचंद जी जग्गी ने भलाई और मानवता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए अपने जीवनकाल में 101 गरीब कन्याओं का विवाह अपने खर्चे पर कराया। यह दौर 1955 से लेकर 1970 का रहा। अतुल मानते हैं कि उनके दादाजी के सद्कर्म परिवार के साथ हमेशा आशीर्वाद के रूप में रहे हैं। अतुल की शिक्षा भी गुना में ही हुई है। इन्होंने ग्रेज्युएट किया और लॉ के छात्र भी रह चुके हैं। इनके बड़े पुत्र एमिटी युनिवर्सिटी नाऐडा से बायोटेक्नोलॉजी का अध्ययन कर चुके हैं। छोटे पुत्र पूना सिमबायोसिस से लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं। अतुल जग्गी के जीवन की एक और उपलब्धि है कि इनकी पुत्री ऐश्वर्या ने एमबीबीएस पूरी कर ली है और वर्तमान में इंदौर से पीजी कर रही हैं। ऐश्वर्या ने अपने परिजनों के पदचिन्हों पर चलते हुए कोरोना संक्रमण के दौर में गुना की बहुत सेवा की है। तब उन्होंने गुना जिला अस्पताल में पदस्थ रहते ही यहां काम किया और सैकड़ों लोगों का जीवन बचाया। अतुल बताते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है, जो पीडि़त मानवता की रक्षा कर रही है। अतुल जग्गी के जीवन में महत्वपूर्ण व्यक्तियों में उनकी पत्नि श्रीमती अंजु जग्गी अग्रणी हैं। व्यवसायिक और जीवन के प्रत्येक संघर्ष में श्रीमती अंजु जग्गी ने अपने पति अतुल का बखूबी साथ दिया है। श्रीमती अंजु शहर की मानी-मानी समाजसेवी हैं। वर्तमान में महिला पंजाबी समाज की अध्यक्ष, लायंस क्लब गुना दृष्टि की अध्यक्ष जैसे दायित्वों का निर्वाहन कर रही हैं। अतुल जग्गी बताते हैं कि अंजु से विवाह के बाद उनके जीवन में बड़े बदलाव आए। पारिवारिक जिम्मेदारियों का आभास हुआ और सफलता, संघर्ष के दौर में हमेशा उनका मार्गदर्शन मिला।

शुरुआत से शिखर तक
यह जानकर बड़ा रोचक प्रतीत होता है कि अब के सफल कॉलोनाइजर और रियल एस्टेट कारोबारी अतुल जग्गी कभी आईपीएस बनना चाहते थे। कद-काठी इस योग्यता पर खरी उतरती थी, लेकिन ईश्वर और नियति को और ही मंजूर था। साल 1989 में केवल 22 वर्ष की आयु होते ही यह रियल एस्टेट कारोबार में उतर आए। परिवार का बड़ा व्यापार होने के बावजूद इन्हें कालोनाइजर और रियल एस्टेट कारोबार अच्छा लगा। शुरुआत अपनी ही कुछ पुश्तैनी जमीनों से की। इस व्यापार को लम्बे समय तक समझने का प्रयास किया, लोगों से मिलकर जाना कि वह चाहते क्या हैं, रियल एस्टेट व्यवसाय होता क्या है। क्योंकि तब गुना के लिए यह कारोबार एकदम नया था। यह कहना भी अतिश्योक्ति नहीं है कि रियल एस्टेट कारोबार को गुना में शुरु करने वाले ही अतुल जग्गी हैं। पहली बार लोगों ने जाना कि इसे व्यवसाय के रूप में भी कर सकते हैं। इससे पहले गांव या शहर के कुछ गणमान्य लोग दो पक्षों को साथ बिठाकर सौदे करा देते थे। अतुल ने जब रियल एस्टेट कारोबार शुरु किया तो इस क्षेत्र से लोगों को रोजगार भी मिलने लगा। फिर तो कारोबारियों की बाढ़ आ गई, लेकिन अतुल पर तब भी भरोसा था आज भी शहर के नागरिक इन्हें सबसे अच्छा कालोनाइजर मानते हैं। अतुल बताते हैं कि उन्हें अपने छात्र जीवन में ही आभास था कि गुना बहुत सीमित है, इसके विस्तार की संभावनाएं हैं और विस्तार होना चाहिए। उन्होंने इसी मंशा के साथ यह व्यवसाय शुरु किया था। ईश्वर ने सहयोग किया और सफलता बढ़ती गई। सबसे पहले साल 1990 में वंदना कॉन्वेंट स्कूल के पीछे विंध्याचल कॉलोनी विकसित की थी। इसके बाद ए-वन कॉलोनी बनाई फिर वीआई कॉलोनी विकसित की और न्यूसिटी कॉलोनी का प्रोजेक्ट शुरु किया। यह सभी कॉलोनियों गुना शहर के विकास में मील का पत्थर साबित हुईं। अतुल के काम करने की विशेषता यह भी है कि यह जिस जमीन को विकसित करते हैं वह भविष्य में महंगी होने के साथ-साथ शहर की प्रमुख लोकेशन के रूप में उभर जाती है। जिन कॉलोनियों का जिक्र किया गया आज वह गुना शहर की सर्वाधिक पॉश और विकसित कॉलोनियों में शामिल हैं। अतुल जग्गी अब तक गुना शहर को लगभग 15 ऐसी कॉलोनियां दे चुके हैं, जिनमें रहने वाले लोग अपने आपको भाग्यशाली समझते हैं और जिनके पास इन कॉलोनियों में नहीं है, वह इन्हें एक स्वर्णिम सपने की तरह देखते हैं। निरंतर कार्य से निरंतर सफलता अतुल जग्गी को मिली है, इनके कार्य व्यवसाय का विस्तार भी लगातार हो रहा है। गुना के अलावा डबरा में भी काम जारी है। यहां 3 कॉलोनियां विकसित कर चुके हैं। इनमें चीनौर रोड स्थित सांई सिटी कॉलोनी और ओम सांई विहार कॉलोनी शामिल हैं। डबरा के लोग भी जानने लगे हैं कि विकसित कॉलोनियां क्या होती हैं।

आते रहे उतार-चढ़ाव
नियति और समय के अनुरूप अतुल जग्गी के जीवन में भी उतार-चढ़ाव आते रहे हैं। सफलता का क्रम निरंतर चल रहा था। उसी दौरान अतुल जग्गी के बड़े भाई श्री अनिल जग्गी दुर्घटना का शिकार हो गए और 24 दिनों बाद उन्हें होश आया। इसके बाद उनकी मानसिक स्थिति अब तक सामान्य नहीं हो पाई। अतुल जग्गी पर तब परिवार की सभी जिम्मेदारियों का भार आ गया। अपने पूरे जीवन को संघर्ष बताकर कहते हैं कि परमात्मा हमेशा साथ देता है और दे रहा है। प्रयासों के परिणाम हमेशा अच्छे आए हैं। अपने कार्यों से संतुष्ट हूं, जो काम किया उससे संतुष्ट रहा। समय-समय पर लोगों की मदद करना भी अतुल के स्वभाव में है। रजिस्ट्री कराते समय से यदि कोई व्यक्ति आर्थिक अक्षमता जाहिर करता है तो जितना संभव हो सकता है अतुल उतनी रियायत देते हैं। कई गरीब व्यक्तियों को इन्होंने हजारों रुपयों की रियायत दी। अतुल कहते हैं कि गुना के लोग बड़े ईमानदार हैं। यदि रजिस्ट्री कराते समय कोई व्यक्ति कुछ कम पैसों की व्यवस्था कर पाया, तो उसने निकट भविष्य में वह राशि वापस की। उनका प्रयास तो यह रहा कि व्यक्ति निराश न हो। थोड़ी-बहुत राशि के लिए वह अपने प्लॉट से वंचित न रहे। समय-समय पर दान-पुण्य में भी अतुल जग्गी का योगदान रहा है। अपने दादाजी के प्रयासों से सीख लेकर अतुल जग्गी ने गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग किया। अतुल बताते हैं कि लोगों की दुआऐं हमेशा साथ रहती हैं, जो विपदा के समय काम आती है। इसलिए सकारात्मक विचार, ईमानदारी से अपना काम करना जरूरी है और अगर आप थोड़े सक्षम हैं तो यथा संभव परोपकार भी अवश्य कीजिए।

सर्वसुविधायुक्त हैं सांई धाम पार्ट-2 और न्यूसिटी पार्ट-2
अतुल जग्गी वर्तमान में अपने नए प्रोजेक्ट सांई धाम पार्ट-2 जगनपुर गुना और न्यू सिटी पार्ट-2 कोल्हुपुरा पर काम कर रहे हैं। इन कॉलोनियों की विशेषताएं बताते हुए कहते हैं कि लोगों को यहां आकर जीने का आनंद आएगा। यही उनका प्रयास रहा है। इन दोनों ही कॉलोनियों के शुरुआत अध्याय ने गुना के नागरिकों को खासा आकर्षित किया था। इसी से प्रभावित और प्रोत्साहित होकर अतुल जग्गी ने इनके दूसरे अध्यायों की शुरुआत की और अच्छा रिस्पॉन्स अब तक मिल रहा है। अतुल जग्गी के मुताबिक गुना के नागरिक कुछ अच्छा चाहते हैं, अच्छी जगह और अच्छे वातावरण में रहना चाहते हैं। इसका वह पूरा ख्याल रखते हैं और प्रयास रहता है कि नागरिकों की उम्मीदों पर खरा उतरा जाए।

पिता के आशीर्वाद ने दिखाई राह
अतुल जग्गी के पिता ग्रेन मर्चेन्ट व्यवसाय में अच्छा नाम कमा चुके थे। लेकिन अतुल जग्गी को शायद इस व्यापार में दिलचस्पी नहीं थी। स्व. नानकचंद जी जग्गी ने उनकी मंशा को समझा और अतुल से कहाकि वह जो करना चाहते हैं कर सकते हैं, बस ईमानदारी का ख्याल रखें। बचपन से लेकर अब तक जीवनयात्रा का जिक्र करते हुए अतुल जग्गी बताते हैं कि पिताजी ने हमेशा सहयोग किया और आशीर्वाद दिया। उन्होंने कुछ टूटने नहीं दिया, हमेशा मनोबल बढ़ाते रहे। 11 वर्ष पहले उनका साया हमेशा छूट गया है, निश्चित रूप से वह पल हृदय पर आघात जैसा था। हमेशा पिताजी की सीख और उनके द्वारा दिखाई राह हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी।