संतोष यादव: संचालक एस.एल. मेमोरियल स्कूल, गुना


शिक्षा को बनाया समाज उत्थान का जरिया
शहर में स्थापित किए दो उत्कृष्ट शिक्षण संस्था

संतोष यादव गुना जिले के जाने-माने शिक्षाविद हैं। इनकी जीवन यात्रा संघर्ष से भरी पड़ी है। फर्श से अर्श का सफर तय करने वाले संतोष यादव ने प्रमाणित किया है कि सकारात्मक सोच, निरंतर प्रयास और सही दिशा में आगे बढऩे के परिणाम हमेशा प्रभावी होते हैं। समाज उत्थान की सोच हमारे बीच रहने वाले हर दूसरे व्यक्ति में होना लाजिमी है, लेकिन फर्क इस बात से पड़ता है कि इस उत्थान किस तरह का हो। दुनियाभर में उदाहरण हैं कि शिक्षा ही उत्थान का ऐसा हथियार है, जो वास्तविक उन्नति का मार्ग दिखाता है और हर परिस्थितियों में लडऩे, संघर्ष करने और जूझने की ताकत हम सभी को देता है। संतोष यादव ने इस सोच को आत्मसात किया है और उसे धरातल पर भी उतारा है।

सामान्य परिचय
संतोष यादव की अधिकांश जीवन यात्रा गुना में ही संघर्ष करते हुए बीता है। एक शिक्षक के रूप में इन्होंने अपना सफर शुरु किया, बच्चों को मार्गदर्शन दिया। बेहद कम संसाधनों और मार्गदर्शन के बिना ही एक ऐसी संस्था की नींव रखी जो आज गुना में किसी तरह की मोहताज नहीं है।

एस.एल. मेमोरियल स्कूल का नाम गुना में बच्चे-बच्चे की जुबान पर है। इस संस्था ने न केवल जिले में कई बार हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा के टॉपर्स दिए हैं, बल्कि जिले में शिक्षा के स्तर को सुधारने में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हालांकि गुना जिले में एमपी बोर्ड के साथ-साथ सीबीएसई माध्यम से संचालित एस.एल. मेमोरियल स्कूल अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। इन दोनों ही संस्थाओं को जिले में स्थापित करने और उसे शिखर तक पहुंचाने में इनके संस्थापक संतोष यादव का महत्वपूर्ण योगदान है। एक छोटी सी शैक्षणिक संस्था को वटवृक्ष का आकार देने वाले संतोष यादव जितने साधारण स्वभाव के हैं, उतने ही दूरदर्शी भी। समय के साथ कब और कितने परिवर्तन, सुधार करने हैं, इसकी पूरी कार्ययोजना संतोष यादव के पास पहले ही तैयार रहती है। इसीलिए जब उन्होंने एमपी बोर्ड से संचालित शाला को जिले में एक माइलस्टोन के रूप में स्थापित कर दिया तो उसके बाद वर्तमान पीढ़ी के सीबीएसई पर भरोसे का भी पूरा सम्मान किया। संतोष यादव के निर्देशन और मार्गदर्शन में सिसौदिया कॉलोनी और भगत सिंह कॉलोनी में दोनों ही शिक्षण संस्थाएं अपने-अपने माध्यम में जिले के अंदर सर्वश्रेष्ठ बनी हुई हैं। श्री यादव के दिलचस्प मगर संघर्षपूर्ण सफर की शुरूआत उस समय हुई जब उन्होंने शैक्षणिक ढांचे में कुछ कमियां देखी और शहर में अच्छे शिक्षा संस्थानों की आवश्यकता को महसूस किया। सेवा परमो धर्म मानकर प्रशासनिक अधिकारी की हैसियत से नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से समाज उत्थान का बीड़ा संतोष यादव ने उठाया, जिसमें वह सफल भी हुए हैं। उच्च शिक्षित संतोष यादव ने एमएससी (गणित), एमए (मनोविज्ञान) जैसी डिग्रियां हासिल करने के बाद लोक सेवा आयोग के माध्यम से सिविल सेवा में जाने का मन बनाया। उन्होंने शिक्षा को व्यवसाय न मानकर सेवा का माध्यम समझा। श्री यादव के अनुसार वह जीवनभर शिक्षा की प्रगति के लिए काम करना चाहते हैं। जिसमें पूरे मन से लगे हुए हैं और अभी तक कई आयाम भी स्थापित कर चुके हैं। लेकिन शहर की शैक्षणिक आवश्यकताओं को देखते हुए वर्ष 1995 में 10वीं और 12वीं के छात्राओं को कोचिंग देना शुरू किया। उस समय उच्च प्रशिक्षित शिक्षकों का आभाव था, इसलिए यादव के पास स्टूडेंटों की भीड़ उमड़ पड़ी। अपने अनुभव का लाभ शहर के छात्र-छात्राओं को देने के लिए उन्होंने वर्ष 2000 में सिसौदिया कॉलोनी क्षेत्र में एस.एल. मेमोरियल स्कूल की नींव रखी। यह शिक्षण संस्था कई मायनों में अन्य संस्थानों से अलग थी। कम फीस, बेहतर प्रबंधन और अनुभवी स्टाफ के तालमेल ने एस.एल. मेमोरियल स्कूल को दिन-दोगुनी, रात-चौगुनी शोहरत दिलाई। अभी तक तकरीबन 25 वर्षों की शैक्षणिक संस्था चलाने का अनुभव प्राप्त यादव ने एस.एल. मेमोरियल स्कूल को जो ऊचाइयां दी हैं, उससे सभी अवगत हैं। संस्था के कई छात्र मप्र और राष्ट्रीय स्तर पर गुना जिले का नाम रोशन कर चुके हैं। मैरिट सूची में स्थान बनाना एस.एल. मेमोरियल स्कूल के छात्र-छात्राओं के लिए आम बात हो गई है। सिसौदिया कॉलोनी में मप्र शासन से मान्यता प्राप्त एस.एल. मेमोरियल स्कूल अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत भी संचालित हो रहा है। इस नवीन स्कूल के लिए शहर की भगत सिंह कॉलोनी में एक विशाल और नवीन इमारत का निर्माण भी किया गया, जहां शैक्षणिक वातावरण अच्छी तरह से मिल सके। शीघ्र ही यह विद्यालय 12वीं तक संचालित होगा।

लोगों का जीवन स्तर बदलना चाहते हैं
संतोष यादव बताते हैं कि उनके विद्यालयों में कई ऐसे छात्र भी हैं, जो ग्रामीण परिवेश से आते हैं। किसी के माता-पिता शिक्षक नहीं है, तो किसी ने अपने माता-पिता को बेहद कम आयु में ही खो दिया। उनका प्रयास रहता है कि ऐसे बच्चों पर अधिक से अधिक ध्यान दिया जाए, जिन्हें परिस्थितियों ने प्रताडि़त किया है। उनकी मानसिक स्तर से लेकर शैक्षणिक स्तर में सुधार हेतु वह स्वयं निगरानी करते हैं। एस.एल. मेमोरियल स्कूल में मेधावी छात्रों की संख्या अधिक है, लेकिन शैक्षणिक और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए भी यह संस्था निरंतर प्रयासरत है, ताकि शिक्षा की समानता के सिद्धांत को भी प्रतिपादित किया जा सके।