गंभीर बीमारी से पीड़ित रूबी के लिए उम्मीद की किरण बनी जनसुनवाई


गुना। जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाली जनसुनवाई एक बार फिर एक जरूरतमंद नागरिक के लिए वरदान साबित हुई है। गंभीर हृदय रोग से जूझ रही रूबी अहिरवार के लिए आज का दिन खुशियों भरा रहा, जब लंबे संघर्ष के बाद उनके हाथ में अपना आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड आया। यह न केवल एक दस्तावेजी जीत है, बल्कि उनके इलाज के लिए बंद हो चुके रास्तों के दोबारा खुलने की कहानी भी है।
तकनीकी उलझन और संघर्ष रूबी अहिरवार पिछले काफी समय से एक जटिल तकनीकी समस्या का सामना कर रही थीं। उनके बायोमेट्रिक गलती से उनकी दिवंगत बहन अंजलि अहिरवार के आधार कार्ड से लिंक हो गए थे। इस त्रुटि के कारण न तो रूबी का नया आधार कार्ड बन पा रहा था और न ही पुराने डेटा में सुधार संभव था। आधार कार्ड न होने की वजह से वह शासन की आयुष्मान भारत योजना के लाभ से भी वंचित थीं, जो उनके हृदय रोग के उपचार के लिए नितांत आवश्यक था। प्रशासन की संवेदनशीलता और सतत प्रयास मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे प्राथमिकता पर लिया। शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच कई बार यूआईडीएआई को ई-मेल भेजे गए। समाधान न होने पर फरवरी में पुन: संपर्क साधा गया और भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों से व्हाट्सएप व दूरभाष के माध्यम से निरंतर समन्वय बनाए रखा गया। मिली सफलता, अब होगा नि:शुल्क उपचार प्रशासनिक सक्रियता का परिणाम यह रहा कि 1 अप्रैल 2026 को यूआईडीएआई ने पुरानी त्रुटि को सुधारते हुए दिवंगत बहन का आधार कार्ड निरस्त किया। इसके तुरंत बाद रूबी का नया आधार पंजीयन कराया गया, जो 6 अप्रैल को जनरेट हो गया। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मात्र 24 घंटे के भीतर 7 अप्रैल को रूबी का आयुष्मान कार्ड भी तैयार करवा दिया।