कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल: फतेहगढ़ थाना प्रभारी अभिषेक तिवारी


गुना जिले के फतेहगढ़ थाना क्षेत्र में वर्तमान में थाना प्रभारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे अभिषेक तिवारी आज केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि जनता के विश्वास, सुरक्षा और न्याय का मजबूत प्रतीक बन चुके हैं। उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन, पारिवारिक संस्कार और समाजसेवा की भावना से भरा हुआ है। बचपन से लेकर पुलिस विभाग में एक जिम्मेदार अधिकारी बनने तक की उनकी यात्रा हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

अभिषेक तिवारी का जन्म एक साधारण एवं संस्कारी परिवार में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय श्री कालीचरण तिवारी मेहनती, ईमानदार और कर्मठ व्यक्तित्व के धनी थे। वे ग्वालियर की प्रसिद्ध बालाजी बस में नौकरी करते थे। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने खेती-किसानी का कार्य भी जारी रखा, ताकि परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें। उनकी माता श्रीमती अंगूरी तिवारी एक गृहिणी है  जिन्होंने परिवार को संस्कार, अनुशासन और प्रेम की डोर में बांधकर रखा। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा मेहनत और ईमानदारी को अपनी सबसे बड़ी पूंजी माना।

बचपन से ही अभिषेक तिवारी ने अपने पिता को कठिन परिश्रम करते देखा। यही कारण था कि उनके भीतर जिम्मेदारी, सेवा और समाज के प्रति समर्पण की भावना विकसित होती गई। उन्होंने समझ लिया था कि जीवन में सफलता केवल बड़े सपने देखने से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर मेहनत करने से मिलती है। परिवार के संघर्षों ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। 

युवा अवस्था में ही उन्होंने यह संकल्प लिया कि वे ऐसा कार्य करेंगे जिससे समाज में सुरक्षा, न्याय और व्यवस्था स्थापित हो सके। इसी सोच के साथ उन्होंने पुलिस विभाग को अपना कर्मक्षेत्र चुना। कठिन मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने पुलिस सेवा में प्रवेश किया। उनकी पहली पोस्टिंग खरगोन जिले  में हुई, जहां उन्होंने अपनी कार्यशैली, ईमानदारी और अनुशासन से अधिकारियों एवं जनता दोनों का विश्वास जीता।

पुलिस विभाग में रहते हुए अभिषेक तिवारी ने केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक ही अपने कार्य को सीमित नहीं रखा, बल्कि समाजहित के अनेक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेष रूप से “मुस्कान अभियान” के अंतर्गत उन्होंने कई ऐसे बच्चों को उनके परिवारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो विभिन्न कारणों से अपने घरों से दूर हो गए थे। किसी खोए हुए बच्चे को उसके माता-पिता से मिलाने का जो सुख होता है, वह उनके कार्यों में स्पष्ट दिखाई देता है। यही मानवीय संवेदनाएं उन्हें एक अलग पहचान देती हैं।

इसके अलावा उन्होंने समाज को नशे और मादक पदार्थों की गिरफ्त से बचाने के लिए भी लगातार प्रयास किए। उन्होंने युवाओं को जागरूक करने, अपराधियों पर कार्रवाई करने और लोगों को नशे से दूर रखने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए। उनका मानना है कि किसी भी समाज का भविष्य उसके युवा होते हैं, और यदि युवा नशे की गिरफ्त में चले जाएं तो समाज का विकास रुक जाता है। इसलिए वे अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सामाजिक सुधार को भी अपनी जिम्मेदारी मानते हैं।

वर्तमान में फतेहगढ़, गुना में थाना प्रभारी के रूप में कार्य करते हुए अभिषेक तिवारी की सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने क्षेत्र को अपराधमुक्त बनाना है। वे चाहते हैं कि आम नागरिक बिना भय के अपना जीवन जी सकें, महिलाएं सुरक्षित महसूस करें, व्यापारी निश्चिंत होकर व्यापार कर सकें और बच्चे सुरक्षित वातावरण में अपना भविष्य बना सकें। उनकी कार्यशैली में कठोरता के साथ संवेदनशीलता भी दिखाई देती है। अपराधियों के प्रति सख्त रवैया और आम जनता के प्रति सहयोगात्मक व्यवहार उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाता है।

अभिषेक तिवारी का जीवन यह संदेश देता है कि साधारण परिवार में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी अपने साहस, मेहनत और ईमानदारी के बल पर समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने अपने पिता के संघर्षों और माता के संस्कारों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। आज वे न केवल पुलिस विभाग की जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं, बल्कि समाज में सुरक्षा, विश्वास और मानवता की भावना को भी मजबूत कर रहे हैं।

उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। अभिषेक तिवारी यह साबित करते हैं कि सच्ची सफलता वही है, जिसमें व्यक्ति अपने पद का उपयोग केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज और लोगों की भलाई के लिए करे।